आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे की खनिज संसाधन
किसे कहते हैं,तथा यह कितने प्रकार के होते हैं। खनिज की
क्या-क्या विशेषताएं हैं तथा खनिजों का वितरण कहां पर है।
साथ ही हम यह भी जानेंगे कि खनिज का क्या महत्व है ?
खनिज संसाधन आधुनिक सभ्यता एवं संस्कृति के आधार
स्तंभ है। भारत में लगभग एक सौ से अधिक खनिज मिलते
हैं तथा कुछ खनिजों के उत्पादन एवं भंडार में यह विश्व के
अग्रणी देशों में एक है।
खनिज निश्चित अनुपात में रासायनिक एवं भौतिक
विशेषताओं के साथ निर्मित एक प्राकृतिक पदार्थ है। दूसरे
शब्दों में कहें तो खनिज निश्चित रासायनिक संयोजन एवं
विशिष्ट आंतरिक परमाण्विक संरचना वाले ठोस प्राकृतिक
पदार्थ को कहा जाता है ।अभी तक लगभग 2,000 से
अधिक खनिजों की पहचान की जा चुकी है किंतु 30 खनिज
ही आर्थिक दृष्टि से विशिष्ट महत्त्व रखते हैं।
खनिजों के प्रकार:_
खनिज मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:__
1) धात्विक खनिज :__इन खनिजों में धातु होता है जैसे_
लौह अयस्क ,तांबा ,निकल ,मैग्नीज। धात्विक खनिज भी दो
प्रकार के होते हैं:_
a) लौह युक्त खनिज :_जिन धात्विक खनिजों में लोहे का अंश
अधिक पाया जाता है वह लौह युक्त खनिज कहलाते हैं।
जैसे:_लौह अयस्क ,मैग्नीज, निकेल ,टंगस्टन आदि ।
b) अलौहयुक्त खनिज:_जिन धात्विक खनिजों में लोहे का
अंश कम होता है या नहीं होता है वह अलौहयुक्त खनिज
कहलाते हैं जैसे सोना, चांदी ,सीसा ,बॉक्साइट ,टिन ,तांबा
इत्यादि।
2) अधात्विक खनिज:_इन खनिजों में धातु नहीं होते हैं ।
जैसे:_चूना पत्थर ,डोलोमाइट, अभ्रक ,जिप्सम आदि
अधात्विक खनिज भी दो प्रकार के होते हैं: _
a) कार्बनिक खनिज :_इनमें जीवाश्म होते हैं।यह पृथ्वी में दबे
प्राणी एवं पादप जीवों के परिवर्तित होने से बनते हैं
,जैसे:_कोयला, पेट्रोलियम आदि।
b) अकार्बनिक खनिज :_इसमें जीवाश्म नहीं होते हैं ,जैसे:
अभ्रक ,ग्रेफाइट आदि।
धात्विक एवं अधात्विक खनिज में अंतर:__
धात्विक खनिज
1) धात्विक खनिज को गलाने पर धातु प्राप्त होता है।
2) यह कठोर एवं चमकीले होते हैं।
3) यह प्रायः आग्नेय चट्टानों में मिलते हैं।
4) इन्हें पीटकर तार बनाया जा सकता है ।यह पीटने पर
टूटता नहीं है।
अधात्विक खनिज
1) अधात्विक खनिज को गलाने पर धातु प्राप्त नहीं होता है।
2) इनकी अपनी चमक होती है।
3) यह प्रायः परतदार चट्टानों में मिलते हैं।
4) इन्हें पीटकर तार नहीं बनाया जा सकता है ,यह पीटने पर
चूर चूर हो जाते हैं।
लौह एवं अलौह खनिजों में अंतर:_
खनिजों की विशेषताएं:___
खनिजों का वितरण असमान होता है ।अधिक गुणवत्ता वाले
खनिज कम तथा कम गुणवत्ता वाले ज्यादा मात्रा में पाए
जाते हैं। खनिज समाप्त होने वाला संसाधन है। एक बार
उपयोग करने के बाद इसका पुनः उपयोग नहीं किया जा
सकता है। अतः इसके संरक्षण की आवश्यकता है।
खनिजों का वितरण: __
भारत में खनिजों का वितरण बहुत ही असमान है ।अधिकतर
खनिज प्राचीन चट्टान समूह में ही पाए जाते हैं ।जैसे :_ लौह
अयस्क एवं मैग्नीज के भंडार देश के कैंब्रियन पूर्व की चट्टानों
के धारवाड़ समूह में पाए जाते हैं ।तो दूसरी और तांबा ,सीसा
एवं जस्ता अरावली श्रेणी में पाई जाती है ।चूना पत्थर,
डोलोमाइट ,जिप्सम एवं कैल्शियम सल्फेट कडप्पा और
ऊपरी विंध्यन समूह तक सीमित है। अधिकांश खनिज चट्टाने
प्रायद्वीपीय भारत में ही पाई जाती है ।भारत के उत्तरी मैदान
की आधार चट्टानों को जलोढ़ की मोटी परत ने पूर्णतः ढक
लिया है अतः वहां खनिजों का अभाव है। देश का अधिकांश
खनिज तीन क्षेत्रों में पाई जाती है।
1) उत्तरी पूर्वी पठार :_यह देश की सबसे धनी खनिज पेटी है
जिसमें छोटा नागपुर का पठार ,उड़ीसा का पठार ,छत्तीसगढ़
का पठार तथा पूर्वी आंध्र प्रदेश का पठार अवस्थित है। इस
पेटी में लौह अयस्क ,मैग्नीज ,अभ्रक ,बॉक्साइट ,चूना पत्थर,
डोलोमाइट, तांबा ,थोरियम, यूरेनियम ,क्रोमियम,
सिलीमेनाइट तथा फास्फेट के विशाल भंडार है।
2) दक्षिणी पश्चिमी पठार:_यह पेटी कर्नाटक के पठार एवं
निकटवर्ती तमिलनाडु के पठार पर फैली हुई है। यहां लौह
अयस्क, मैग्नीज ,बॉक्साइट आदि बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं।
देश की सभी तीनों सोने की खानें इसी पेटी में मौजूद है।
3) उत्तर पश्चिम प्रदेश:_ इस पेटी का विस्तार खंभात की
खाड़ी से लेकर अरावली की श्रेणियों तक है। यहां अनेक
अलौह धातुएं, जैसे चांदी, सीसा ,जस्ता, तांबा आदि मिलते
हैं। बालू पत्थर ,ग्रेनाइट, संगमरमर ,जिप्सम ,मुल्तानी मिट्टी,
डोलोमाइट ,चुना पत्थर ,नमक आदि के भी पर्याप्त भंडार है।
लौह अयस्क:_
लोहा आधुनिक सभ्यता की रीढ़ है। लोहा खान से शुद्ध रूप में
नहीं मिलता बल्कि लौह अयस्क के रूप में निकलता है। शुद्ध
लोहे की मात्रा के आधार पर भारत में लौह अयस्क तीन
प्रकार के होते हैं :_हेमाटाइट ,मैग्नेटाइट ,लिमो नाइट। भारत
में पूरे विश्व के लौह भंडार का एक चौथाई भाग आकलित है।
लौह अयस्क का वितरण:
भारत में लौह अयस्क प्रायः सभी राज्यों में पाया जाता है ।
परंतु यहां के कुल भंडार का 96% कर्नाटक ,छत्तीसगढ़,
उड़ीसा, गोवा ,झारखंड राज्यों में सीमित है। शेष भंडार
तमिलनाडु ,आंध्र पदेश, महाराष्ट्र एवं अन्य राज्यों में अवस्थित
है। भारत में 1950 _51 में 42 लाख टन लोहे का उत्पादन
हुआ था जो 2004 _05 में बढ़कर 1427.1 लाख टन हो
गया ।इस प्रकार लोहे के उत्पादन में भारी विकास हुआ है।
कर्नाटक राज्य भारत का लगभग एक चौथाई लोहा उत्पादन
करता है ।यहां बेल्लारी,haspate, संदूर आदि क्षेत्रों में लौह
अयस्क की खाने हैं ।चिकमंगलूर जिले में बाबा बुदन,
कालाहांडी एवं केमनगुडी की पहाड़ियों में लोहे की अनेक
खाने हैं।
झारखंड देश का पांचवा बड़ा लौह अयस्क उत्पादक राज्य है,
और 15% से अधिक लोहे का उत्पादन करता है ।यहां के
पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम ,सरायकेला ,पलामू ,धनबाद,
हजारीबाग ,लोहरदगा तथा रांची मुख्य उत्पादक जिले हैं।
महाराष्ट्र में लौह अयस्क की खाने चंद्रपुर ,रत्नागिरी और
भंडारा जिले में स्थित है।
खनिजों का आर्थिक महत्व:__
खनिजों का आर्थिक महत्व बहुत ही ज्यादा है ।खनिज
संसाधन के अभाव में देश के औद्योगिक विकास को गति एवं
दिशा नहीं दे सकते ।जिसके कारण देश का आर्थिक विकास
अवरुद्ध हो जाता है। विश्व के बहुत से देशों में खनिज संपदा
राष्ट्रीय आय के प्रमुख स्रोत है ।खनिजों की सबसे बड़ी
विशेषता यह है कि एक बार उपयोग में आने के बाद यह
लगभग समाप्त हो जाते हैं ।इनका संबंध हमारे वर्तमान एवं
भविष्य के कल्याण से हैं ।खनिज ऐसे क्षयशील संसाधन है
जिन्हें दोबारा नवीकृत नहीं किया जा सकता है ।इसलिए
खनिजों का संरक्षण जरूरी है।
खनिजों का संरक्षण:__
खनिज अनवीकरणीय संसाधन है ।इनकी मात्रा सीमित है।
इनका पुनर्निर्माण संभव नहीं है ।खनिज उद्योगों का आधार है
किंतु औद्योगिक विकास के लिए खनिजों का अतिशय दोहन
एवं उपयोग उनके अस्तित्व के लिए संकट है। इसलिए
खनिजों का संरक्षण एवं प्रबंधन आवश्यक है ।खनिज
संसाधन के विवेकपूर्ण उपयोग तीन बातों पर निर्भर करता
है:_ खनिजों के निरंतर दोहन पर नियंत्रण, उनका बचत
पूर्वक उपयोग तथा कच्चे माल के रूप में सस्ते विकल्पों की
खोज। खनिजों पर नियंत्रण के अलावे उनके विकल्पों को
खोजना, खनिजों के अपशिष्ट पदार्थों का बुद्धिमता पूर्ण
उपयोग करना, पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले कुप्रभाव पर
नियंत्रण, खनिज निर्माण के लिए चक्रीय पद्धति को अपनाना
,खनिज प्रबंधन कहलाता है।


1 टिप्पणियाँ
Nice Post
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