आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि जैव विविधता क्या
होता है तथा इसका क्या महत्व है ?
यह भूमंडल जो हम सब लोग का आवास है , सूक्ष्म जीवाणु
और बैक्टीरिया से लेकर वृक्ष,हाथी और ब्लू व्हेल तक करोड़ों
जीवधारी का अधिवास है। इसी को हम जैव विविधता कहते
हैं।
18 वीं शताब्दी में स्वीडन के वैज्ञानिक कैरोलस लीनियस ने
लगभग 5900 प्रकार के पौधों तथा 4200 प्रकार के पशुओं
की पहचान की थी ।अब तक 17 लाख प्रजातियों का
नामकरण किया जा चुका है ।इनमें 10 लाख से अधिक पशु
हैं और 7 लाख पौधों की प्रजातियां हैं ।एक अनुमान के
अनुसार विश्व में 50 लाख से अधिक प्रजातियां हैं ।कुल
प्रजातियों में से आधा से अधिक प्रजातियां विश्व के अज्ञात
उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में पाई जाती है ।जबकि वर्षावन
विश्व के स्थलीय भूभाग का 8% से भी कम क्षेत्रफल है।
हमारा देश जैव विविधता के संदर्भ में विश्व के सर्वाधिक
समृद्ध देशों में से एक है। इसकी गणना विश्व के 12 विशाल
जैविक विविधता वाले देशों में की जाती है। यहां विश्व की
सारी जैव उपजातियों का 8% संख्या लगभग 16 लाख पाई
जाती है।
जैव विविधता के संदर्भ में हमारा ज्ञान बहुत कम है।
इस भूमंडल पर पेड़ पौधे एवं जीव जंतु की जातियां प्रजातियां
उपजातियां संख्या से कहीं अधिक होने की संभावना है।
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि प्रत्येक वर्ष 10 हजार
के लगभग नवीन प्रजातियां की उत्पत्ति हो रही है।
हमारा देश जैविक विविधता में समृद्ध देश है । सबसे समृद्ध
जैव विविधता वाला क्षेत्र पश्चिमी घाट और उत्तरी पूर्वी भारत
है। इनमें क्रमश: भारत का 4 % और 5.2 प्रतिशत
भौगोलिक क्षेत्रफल है ।विश्व के 25 हॉटस्पॉट में इन्हें भी रखा
गया है। इनमें असंख्य प्रकार के जैविक समूह रहते हैं ।भारत
में 33 % पुष्पीय पौधों भारतीय मूल के हैं ।इसी प्रकार 53%
स्वच्छ जल मछली 60% एंफीबियंस 30 % रेंगने वाली
प्रजातियां और 10% स्तनपाई प्रजातियां भारतीय मूल के हैं।
पूर्वोत्तर भारत पश्चिमी घाट, उत्तर पश्चिम हिमालय, अंडमान
निकोबार दीप समूह मुख्य रूप से देशज क्षेत्र के रूप में
प्रसिद्ध हैं । कुछ एंफीबियन पश्चिमी घाट में भारतीय मूल के
हैं।
यूनेस्को के सहयोग से भारत में 14 जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र
की स्थापना की गई है। राष्ट्र के स्वस्थ जैवमंडल एवं जैविक
उद्योग के लिए समृद्ध जैव विविधता अनिवार्य है। जैव
विविधता का उपयोग हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दोनों रूप से
करते हैं। जैवविविधता हमारे लिए भोजन ,औषधियां
,रेशा,रबर, और लकड़ियों का साधन है। कई सूक्ष्मजीवों का
उपयोग बहुमूल्य उत्पाद तैयार करने के लिए उद्योग में प्रयोग
होता है । यह हमें मुफ्त में बहुत सारी सेवा प्रदान करता है।
मानव की भोजन पूर्णता जैविक संसार से प्राप्त होता है ।कई
हजार प्रजातियां खाद्य योग्य पौधों की है किंतु लगभग 85%
संसार का भोजन 20 से भी कम की प्रजातियों से खेती द्वारा
उत्पन्न किया जाता है ।शेष 15% पशुओं से उत्पन्न किया
जाता है।
विकसित पौधों एवं घरेलू जानवरों की कुशल नस्ल आधुनिक
खेती की रीड की हड्डी है। बहुत सारी प्रकार की फसलें और
अन्य उपयोगी पौधे प्रजनन क्रिया योजना के द्वारा विकसित
किए गए हैं ।जंगली प्रजातियों का अनुवांशिकी का उपयोग
नए गुणों के लिए होता है जैसे रोग रोधी अथवा विकसित
घरेलू प्रजातियों की उपज के लिए ।उदाहरण के लिए एशिया
में धान की खेती का चार प्रमुख रोगों से संरक्षण एक अकेला
जंगली भारती चावल प्रजाति orzya nivara से किया
जाता है।
जैव विविधता का उपयोग बहुत सारी औषधीय
उपयोग में होता है ।बहुत सारे तत्वों से रोग उपचार गुणों को
पौधों से प्राप्त किया जाता है। जैसे marphine का उपयोग
दर्द निरोधक के लिए किया जाता है और इसे papaver
somniferem से प्राप्त किया जाता है। Quinine
मलेरिया के लिए उपयोगी है यह Chinchona
Ledgenriana से प्राप्त होता है।Taxol कैंसर रोधी
औषधि है जो एक प्रकार के सदाबहार वृक्षों के छाल Taxus
baccota and T.brevifolia से प्राप्त किया जाता है।
अधिकतर परंपरागत दवाइयों का निर्माण पौधों से होता है।
Tropical botanical garden and research
institute नामक संस्था की एक टीम केरल में पश्चिमी घाट
के जैविक अभियान पर थी । इस टीम ने आदिवासियों के
कुछ सदस्य को मार्गदर्शन के रूप में साथ ले लिया ।
वैज्ञानिकों ने देखा ये लोग एक फल खा रहे थे जिससे उन्हें
दुर्लभ मार्ग चलने के बावजूद काफी ऊर्जावान बना दिया जब
वैज्ञानिकों ने इस फल को खाया तो उन्हें भी अचानक ऊर्जा
एवं शक्ति की अनुभूति हुई।
जब वैज्ञानिकों ने इसकी जानकारी प्राप्त कर ली तो इस पर
शोध किया तो पाया कि यह तनाव रोधक है ,और इसमें अन्य
लाभकारी एवं गुणकारी सक्रिय तत्व है ।
*विश्व की एक लाख कीट पतंगों की जातियों में से
60,000 जातियां भारत में है ।
*4100 मछलियों की प्रजातियों में से भारत में 1693
प्रजातियां है।
*विश्व की 9,000 पक्षियों की जातियों में से लगभग
1200 भारत में पाई जाती है ।इसी प्रकार स्तनपाई जीव
का 10 % भारत में है।
*पादप बहुल देशों में भारत का दसवां स्थान है।
*चावल, गन्ना , जूट,आम,नींबू ,केला ,बाजरा, ज्वार
फसलों का उद्भव भारत में हुआ ।
*कम से कम 136 फसल प्रजातिया है और 320 वन
संबंधी प्रजातियां मूलता भारतीय है।
*भारत में चावल के 50,000 से 60,000 के किस्म पाई
जाती है ।


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