Hello friends, आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे की प्रतिरोधकता किसे कहते हैं उससे पहले हम आपको बताएंगे की प्रतिरोध किसे कहते हैं?
प्रतिरोध:_इलेक्ट्रॉन के प्रवाह में किसी पदार्थ के अणुओं द्वारा जो रुकावट उत्पन्न होती है उसेेे उस पदार्थ के टुकड़े, अर्थात् प्रतिरोधक का प्रतिरोध कहा जाता है। दूसरे शब्दों में चालक केेेे उस गुण को जो विद्युत धारा की प्रबलता को निर्धारित करता हैैैैै चालक का विद्युत प्रतिरोध या केवल प्रतिरोध कहा जाता है।
निश्चित विभवांतर पर किसी प्रतिरोधक से प्रवाहित धारा की प्रबलता कम होती है तो चालक का प्रतिरोध अधिक होता है परंतु यदि प्रवाहित धारा की प्रबलता अधिक होती है तो चालक का प्रतिरोध कम होता है। किसी चालक तार मे विद्युत धारा प्रवाहित करने के लिए उसके सिरों के बीच विभवांतर उत्पन्न करना आवश्यक है ।यदि विभवांतर V के कारण विद्युत धारा I प्रवाहित हो तो V aur I के अनुपात को उस तार अर्थात प्रतिरोधक का प्रतिरोध कहा जाता है अर्थात R =V/I
.
प्रतिरोधकता किसे कहते हैं?
किसी प्रतिरोधक का प्रतिरोध R उसकी लंबाई L के समानुपाती तथा अनुप्रस्थ काट A के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
प्रतिरोधकता पदार्थों का एक महत्वपूर्ण गुण है ।धातु एवं मिश्र धातु की प्रतिरोधकता बहुत कम होती है, जबकि विद्युत रोधी पदार्थ की प्रतिरोधकता का मान अत्यधिक होता है।
किसी चालक के पदार्थ की प्रतिरोधकता ताप के बढ़ने से बढ़ती है तथा ताप के घटने से घटती है।
किरचॉफ के नियम:__
किसी साधारण परिपथ में विद्युत धारा तथा विभवांतर के वितरण को ओम के नियम से प्राप्त किया जाता है लेकिन जटिल विद्युत परिपथ में धारा एवं विभवांतर के वितरण को ज्ञात करने के लिए किरचॉफ के नियम प्रयुक्त होते हैं किरचॉफ के नियम निम्नलिखित हैं:_
पहला नियम:_ चालकों के किसी जाल में किसी बिंदु पर मिलने वाली विद्युत धारा का algeberaic sum शून्य होता है।
दूसरा नियम:_किसी बंद विद्युत परिपथ के प्रत्यक भाग में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा तथा उसके प्रतिरोध के गुणन फल का बीजीय योग परिपथ में लगे कुल विद्युत वाहक बल के बराबर होता है।
किरचॉफ के प्रथम नियम का सीधा संबंध आवेश के संरक्षण से है जबकि दूसरा नियम ऊर्जा संरक्षण नियम का पालन करता है।
Wheastone Bridge kya hota hai:_
यदि 4 प्रतिरोधों को एक चतुर्भुज के चारों भुजाओं के रूप में जोड़ा जाए तथा दो परस्पर सम्मुख बिंदुओं के एक जोड़े के बीच एक गैल्वेनोमीटर और शेष दो सम्मुख बिंदुओं के बीच एक सेल लगा दिया जाए तो इस प्रबंध को व्हीटस्टोन ब्रिज कहा जाता है सामान्यता प्रतिरोध का मापन इसी सिद्धांत पर बने उपकरणों द्वारा किया जाता है।
विभवमापी (potentiometer):_
विभवमापी एक ऐसा विद्युतीय उपकरण है जिसके द्वारा किसी सेल के विद्युत वाहक बल अथवा किसी विद्युत परिपथ के दो बिंदुओं के बीच विभवांतर की माप की जाती है। इसके द्वारा किसी अज्ञात विभावनतर का मान ज्ञात किया जाता है इसलिए इसे विभवमापी भी कहा जाता है। विभवांतर के अतिरिक्त इसकी सहायता से परिपथ में प्रवाहित धारा या उसके किसी भाग के प्रतिरोध का मापन भी किया जाता है।
किसी विद्युत क्षेत्र में किन्ही दो बिंदुओं के बीच विभवांतर की माप कार्य के उस परिमाण से होती है जो प्रति एकांक परीक्षण धन आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में संपादित होता है किसी चालक में आवेश के सतत प्रवाह के लिए उसके सिरों के बीच सेल या बैटरी लगाना पड़ता है जिससे चालक के सिरों के बीच विभवांतर उत्पन्न
होता है। विभवांतर का एस आई मात्रक वोल्ट होता है।
विद्युत वाहक बल तथा विभवांतर में अंतर: __
1) विद्युत परिपथ में विभवांतर एक सामान्य पद के रूप में प्रयुक्त होता है। परिपथ में धारा प्रवाहित होने पर उसके किसी दो बिंदुओं के बीच विभवांतर होता है जबकि विद्युत वाहक बल किसी सेल के लिए होता है। विद्युत वाहक बल से किसी सेल में विद्युत धारा प्रवाहित करने की क्षमता व्यक्त होती है।
2) जब परिपथ खुला हो अर्थात जब सेल से धारा नहीं ली जा रही हो तब उसके ध्रुवों के बीच विभावंतर का मान अधिकतम होता है जो सेल के लिए विद्युत वाहक बल के बराबर होता है। लेकिन जब परिपथ बंद हो अर्थात जब सेल से धारा ली जा रही हो तो ध्रुवों के बीच विभवांतर का मान पहले से घट जाता है । विभवांतर में यह कमी अर्थात लुप्त वोल्ट,धारा की प्रबलता I तथा सेल का आंतरिक प्रतिरोध r पर निर्भर करती है।
स्पष्टता , सेल का विद्युत वाहक बल एक नियत राशि है जबकि उसके ध्रुवों के बीच विभवांतर परिवर्तनशील है और इसका मान धारा के परिवर्तन से बदलता रहता है।
3) किसी परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित करने के लिए यह आवश्यक है कि उसमें विद्युत वाहक बल का एक स्रोत लगा हो परंतु धारा प्रवाहित होने पर परिपथ के किसी भी भाग में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर उत्पन्न होता है ,स्पष्टता धारा प्रवाहित होने का कारण विद्युत वाहक बल है जबकि विभवांतर उसका परिणाम।
सेलो का समूहन( grouping of cells):__
एक सेल का विद्युत वाहक बल कम रहने के कारण इससे प्राप्त धारा की प्रबलता कम होती है ।अधिक प्रबलता की धारा प्राप्त करने के लिए कई सेल के सहयोग से बैटरी तैयार की जाती है। बैटरी से प्राप्त धारा का मान अधिकतम रखने के लिए सेल को विभिन्न प्रकार से जोड़ा जाता है । सेल का आपस में समूह इस बात पर निर्भर करता है की बैटरी के आंतरिक प्रतिरोध तथा परिपथ के बाहर प्रतिरोध के आपेक्षिक मान क्या है ।सेल का समूहन निम्नलिखित तीन प्रकार से किया जाता है
1) श्रेणी क्रम समूह
2) समांतर क्रम समूह
3) मिश्रित क्रम समूह



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