आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि विद्युत धारा का उष्मीय प्रभाव किसे कहते हैं। इससे पहले हम जानेंगे कि विद्युत धारा किसे कहते हैं। विद्युत धारा मूलतः एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवेश का प्रवाह है और जब यह प्रवाह किसी सुचालक बंद पथ में होता है तब उस पथ को विद्युत परिपथ कहा जाता है। दैनिक जीवन में अनेक डिवाइस में जैसे टॉर्च, कंप्यूटर ,रेडियो तथा टेलीविजन आदि में स्थाई धारा का प्रवाह होता है।
विद्युत धारा की परिभाषा:_किसी चालक या तार के किसी अनुप्रस्थ काट से नेट आवेश के प्रवाह की दर अर्थात प्रति सेकंड प्रवाहित नेट आवेश केेे परिमाण से विद्युत धारा की माप होती है।
मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति एस आई मात्रक में 7 आधारी राशियां होती है और उन्हीं में से एक है विद्युत धारा जिसक एस आई मात्रक एंपियर होता है जिसे A से व्यक्त किया जाता है। इसलिए किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से यदि 1 सेकंड में एक कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है तो उस काट से प्रवाहित विद्युत धारा की प्रबलता 1 एंपियर होगी अर्थात 1 amp=1 Coulomb's/1 sec
1 amp=1 C/1
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विद्युत धारा का उष्मीय प्रभाव: (heating effect of electric current)
जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तब वह चालक गर्म हो जाता है अर्थात विद्युत ऊर्जा का ऊष्मा में रूपांतरण होता है इसे ही विद्युत धारा का उष्मीय प्रभाव कहा जाता है।
यदि किसी चालक जैसे धातु के एक तार के दोनों सिरों को एक्सएल या बैटरी से जोड़ा जाता है तो चालक के सिरों के बीच एक विभवांतर स्थापित हो जाता है। चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉन चालक के उच्च विभव के सिरे की ओर त्वरित होते हैं। परंतु इन इलेक्ट्रॉनों की चाल लगातार बढ़ नहीं पाती है क्योंकि वह अपने मार्ग में पड़ने वाले चालक के धनायन से बारंबार टकराते रहते हैं इससे उनकी चाल मंद पड़ जाती है इस प्रकार विभवांतर के कारण इलेक्ट्रॉन जो गतिज ऊर्जा प्राप्त करते हैं उसका कुछ भाग चालक के आयन को दे देते हैं इससे चालक की आंतरिक ऊर्जा बढ़ जाती है और इसके फल स्वरुप चालक का ताप बढ़ जाता है। तप्त चालक इस प्रकार से प्राप्त उर्जा को अपने बगल की वस्तुओं में हीट ट्रांसफर द्वारा वितरित करता है इसका अर्थ यह है कि किसी चालक में प्रवाहित विद्युत धारा द्वारा उत्सर्जित ऊष्मा का परिमाण उसके द्वारा चालक के प्रतिरोध के विरुद्ध किए गए कुल कार्य के बराबर होता है।
विद्युत शक्ति (electric power)
किसी विद्युत परिपथ में विद्युत ऊर्जा के व्यय की दर को उस परिपथ की विद्युत शक्ति कहते हैं।
विद्युत शक्ति का मात्रक:_ यदि किसी परिपथ में एक जूल प्रति सेकेंड की दर से कार्य किया जा रहा हो तो उस परिपथ की विद्युत शक्ति 1 वाट कहलाती है इससे W से सूचित किया जाता है।
विद्युत ऊर्जा: यदि किसी बिजली के बल्ब पर 220 v_60w लिखा हो तो इसका अर्थ होता है कि यदि किसी मकान के विद्युत परिपथ में से लगा दिया जाए तो वह दूसरा 220 वोल्ट के विभवांतर पर 60 w शक्ति का उपयोग करेगा अर्थात प्रति सेकेंड इस बल्ब के के कारण 60 जुल विद्युत ऊर्जा का व्यय होगा।
विद्युत ऊर्जा के घरेलू तथा व्यवसायिक उपयोग के लिए जूल एक छोटा मात्रक है इसके लिए एक दूसरे मात्रक का व्यवहार होता है। यदि विद्युत परिपथ में 1 किलो वाट अर्थात हजार वाट का कोई यंत्र है जैसे हीटर और इसे 1 घंटे तक उपयोग किया जाए तो हम कहते हैं कि परिपथ में 1 किलो वाट घंटा विद्युत ऊर्जा का उपयोग हो रहा है 1 किलो वाट घंटा को एक यूनिट विद्युत ऊर्जा भी कहा जाता है।
किसी बैटरी द्वारा बाह्य परिपथ में उपलब्ध शक्ति को महत्तम होने के लिए बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध बाह्य परिपथ में लगे प्रतिरोध के बराबर होना चाहिए। इस शर्त को महत्तम शक्ति प्रमेय कहा जाता है।


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