आज की इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि जिला परिषद क्या होता है इसके क्या कार्य होते हैं तथा इनके income ka source kya hota hai।
बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 ,के अनुसार प्रत्येक जिला के लिए एक जिला परिषद का गठन किया गया है।
जिला परिषद का गठन:__
जिला परिषद का गठन संपूर्ण जिला को क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में बांटकर किया जाता है। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र से एक सदस्य निर्वाचित होते हैं। लगभग 50,000 की जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि निर्वाचित होता है।
जिला परिषद का कार्यकाल:__
जिला परिषद का कार्यकाल उस की प्रथम बैठक की निर्धारित तिथि से अगले 5 वर्षों तक के लिए निश्चित किया जाता है।
अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष:__
जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य अपने में से एक को अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष निर्वाचित करते हैं। अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के अतिरिक्त अध्यक्ष पद के लिए महिलाओं के लिए भी स्थान आरक्षित किए गए हैं।
अध्यक्ष के कार्य:__
1) जिला परिषद की बैठक बुलाना तथा उसकी अध्यक्षता करना।
2) जिला परिषद के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की गाड़ियों का पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण करना।
3) जिला परिषद की वित्तीय और कार्यपालिका प्रशासन का पर्यवेक्षण करना ।
4) सरकार द्वारा निर्दिष्ट किए गए अन्य कार्य संपन्न करना।
मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी:__
जिलाधिकारी की श्रेणी का पदाधिकारी जिला परिषद का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी होता है जिसकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद की नीतियों और योजनाओं को कार्यान्वित करता है। वह जिला परिषद के सभी कार्य और विकास योजनाओं के शीघ्र निष्पादन हेतु आवश्यक कदम उठाता है।
जिला परिषद के कार्य:__
1) कृषि सिंचाई एवं बागवानी संबंधी कार्य करना a) कृषि उत्पादन को बढ़ाने वाले साधनों को प्रोत्साहित करना b) उन्नत कृषि पद्धतियों के प्रयोगों को लोकप्रिय बनाना और गोदाम की स्थापना और उसकी देखरेख करना c) किसानों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करना d) हम को विकसित करना
2) उद्योग धंधे संबंधी कार्य a) घरेलू एवं लघु उद्योगों का विकास b) पशुपालन एवं मत्स्य पालन तथा वृक्षारोपण और उसकी देखरेख
3) शिक्षा संबंधी कार्य__a) प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना एवं देखरेख b) विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा का प्रचार प्रसार
4) समाज में कल्याण संबंधी कार्य
जिला परिषद के आय के साधन:__
1) केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा दिए गए अनुदान
2) राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत ऋण
3) जिला परिषद द्वारा लगाई गई शुल्क, उपहार या अनुदान तथा अस्पताल ,स्कूल आदि से प्राप्त राशि
4) जुर्माना एवं अर्थदंड से प्राप्त आय आदि
5) पंचायत समिति या अन्य स्थानीय संस्थाओं से प्राप्त अनुदान ।


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