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विद्युत चुम्बकीय प्रेरण किसे कहते हैं ? What is electromagnetic induction?

Hello friends, आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं। और इसके साथ हम यह भी जानेंगे की विद्युत चुंबकीय प्रेरण के फैराडे के नियम क्या है।

फैराडे  ने 1831 में प्रयोगों द्वारा यह पता लगाया कि जब किसी बंद कुंडली के सापेक्ष किसी चुंबक में गति उत्पन्न की जाती है तो बंद कुंडली में लगे गैल्वेनोमीटर में विक्षेप होता है। यह विक्षेप उस समय तक होता है जब तक चुंबक एवं कुंडली के बीच सापेक्षिक गति वर्तमान रहती है।galvanometer मैं विक्षेप होने का अर्थ यह है कि कुंडली में विद्युत वाहक बल तथा विद्युत धारा का प्रेरित होना। अतः किसी बंद कुंडली और चुंबक के बीच सापेक्षिक गति के कारण कुंडली में विद्युत वाहक बल के प्रेरित होने की घटना को विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहा जाता है। कुंडली में उत्पन्न विद्युत वाहक बल को प्रेरित विद्युत वाहक बल तथा उत्पन्न धारा को प्रेरित धारा कहा जाता है।

विद्युत चुंबकीय प्रेरण के फैराडे

 के नियम: _

विद्युत चुंबकीय प्रेरण से संबंधित फैराडे के निम्नलिखित दो नियम हैं:_

पहला नियम __

यदि किसी बंद विद्युत परिपथ से संबद्ध flux मैं समय के साथ परिवर्तन होता है तो परिपथ में विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है और वह तब तक वर्तमान रहता है जब तक चुंबकीय फ्लक्स का परिवर्तन होता रहता है


दूसरा नियम __

किसी कुंडली या बंद परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण उससे संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर का समानुपाती होता है।

विद्युत चुंबकीय प्रेरण की घटना में प्रेरित विद्युत वाहक बल तथा प्रेरित धारा की दिशा लेंज के नियम से ज्ञात की जाती है। इस नियम के अनुसार, विद्युत चुंबकीय प्रेरण के कारण सभी अवस्थाओं में किसी परिपथ में प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार की होती है कि वह उस कारण का ही विरोध करती है जिसके कारण वह अर्थात प्रेरित धारा स्वयं उत्पन्न होती है।

           जब छड़ चुंबक के उत्तरी ध्रुव N को कुंडली की ओर गतिशील किया जाता है तब कुंडली कि उस सिरे पर  वामवर्ती धारा प्रेरित होती है जो एक उत्तरी ध्रुव के जैसा कार्य करता है। अतः प्रेरित धारा की दिशा आते हुए चुंबक को प्रतिकर्षित करती है यहां धारा के प्रेरित होने का कारण स्वयं चुंबक की गति है अतः प्रेरित धारा की दिशा उस कारण अर्थात चुंबक की गति का विरोध करती है जिस कारण से वह स्वयं उत्पन्न होती है।            

  इसी प्रकार जब चुंबक के उत्तरी ध्रुव को कुंडली से दूर ले जाते हैं तब गैल्वेनोमीटर में विपरीत दिशा में विक्षेप होता है अर्थात कुंडली के उस सिरे पर अब दक्षिणावर्ती धारा प्रेरित होती है जो एक दक्षिणी ध्रुव के समान कार्य करता है यहां पर प्रेरित धारा की दिशा दूर जाते हुए चुंबक को अपनी ओर आकर्षित करती है अर्थात चुंबक की गति का विरोध करती है। 



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